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राजीव गांधी ने सोनिया से क्यों कहा था, चाहे जो भी हो मैं मारा ही जाऊंगा

देश के पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न स्व. राजीव गांधी की आज 76वीं जयंती है। इस मौके पर पूरा देश उन्हें श्रद्धांजलि दे रहा है। 1991 में हो रहे लोक सभा चुनाव के प्रचार के लिए राजीव गांधी तमिलनाडु के दौरे पर थे। 21 मई 1991 को मद्रास (अब चेन्नई) के श्रीपेरंबदुर में लिट्टे की आत्मघाती हमलावर धनु ने विस्फोटक भरी माला पहनाकर उनकी हत्या कर दी थी। राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त 1944 को मुंबई में हुआ था। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान लंदन में राजीव गांधी मुलाकात इटली निवासी सोनिया से हुई थी। इस मुलाकात के दौरान दोनों के बीच प्यार हो गया।

संजय गांधी 1968 में इंडियन एयरलाइंस के लिए पायलट के तौर पर काम करने लगे। 1968 में ही राजीव गांधी ने सोनिया से शादी की। संजय गांधी की 23 जून 1980 को एक विमान दुर्घटना में मौत हो गई। जिसके बाद राजीव गांधी को राजनीति में कदम रखना पड़ा। जून 1981 में राजीव गांधी ने लोक सभा उप-चुनाव में जीत हासिल कर संसद पहुंचे थे। संजय गांधी को इंदिरा गांधी का उत्तराधिकारी माना जाता था लेकिन उनके निधन के बाद राजीव गांधी पर यह जिम्मेदारी आ गयी।

राजीव गांधी के करीबी रहे पीसी अलेक्जेंडर ने अपनी किताब ‘माई डेज विथ इंदिरा गांधी’ में भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री की हत्या के बाद राजीव गांधी और सोनिया गांधी के बीच AIIMS में हुई बातचीत का जिक्र किया है। इंदिरा गांधी की 31 अक्टूबर 1984 को उनके दो सिख अंगरक्षकों ने प्रधानमंत्री निवास में गोली मारकर हत्या कर दी थी। हत्या के वक़्त सोनिया गांधी घर पर ही मौजूद थीं। गोलियों से छलनी इंदिरा को कार से लेकर सोनिया AIIMS पहुंची। लेकिन इंदिरा गांधी को बचाया नहीं जा सका।

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इंदिरा गांधी की हत्या के बाद यह साफ था कि राजीव ही उनकी जगह लेंगे। सोनिया गांधी यह बात जानती थीं। पीसी अलेक्जेंडर के अनुसार इंदिरा की हत्या के बाद सोनिया गांधी पूरी तरह हदस गई थीं। एम्स के गलियारे में ही राजीव गांधी से उनकी इंदिरा गांधी की जगह प्रधानमंत्री बनने को लेकर बहस हो गई। पीसी अलेक्जेंडर के अनुसार जब राजीव ने सोनिया को बताया कि कांग्रेस चाहती है कि वो इंदिरा की जगह प्रधानमंत्री बने तो सोनिया ने साफ शब्दों में कहा, ‘नहीं, वो तुम्हें भी मार डालेंगे।’

सोनिया की चिंता को पूरी तरह समझने के बावजूद राजीव ने उन्हें जवाब दिया, ‘मेरे पास दूसरा विकल्प नहीं है। चाहे जो भी हो मैं मारा ही जाऊंगा।’ 31 अक्टूबर 1984 को ही राजीव गांधी ने देश के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ले ली। उसी साल के अंत में राजीव गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने लोक सभा चुनाव में बहुमत हासिल करके दोबारा प्रधानमंत्री बने। नवंबर 1989 में प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।

1991 में हो रहे लोक सभा चुनाव के प्रचार के लिए राजीव गांधी तमिलनाडु के दौरे पर थे। 21 मई 1991 को मद्रास (अब चेन्नई) के श्रीपेरंबदुर में लिट्टे की आत्मघाती हमलावर धनु ने विस्फोटक भरी माला पहनाकर उनकी हत्या कर दी। राजीव गांधी सरकार ने 1987 में लिट्टे आंतकवादियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए भारतीय शांति सेना श्रीलंका भेजी थी। लिट्टे ने इसका बदला लेने के लिए राजीव की हत्या करवा दी। लिट्टे की आत्मघाती हमलावर धनु ने धमाका करने से पहले राजीव गांधी के पैर छुए। धनु ने झुके-झुके ही अपनी कमर में लगा विस्फोटक का स्विच दबा दिया। धमाका इतना शक्तिशाली था कि उसमें राजीव गांधी के शरीर के परखच्चे उड़ गये थे।

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मौत से ठीक पहले राजीव गांधी का इंटरव्यू लेने वाली पत्रकार नीना गोपाल के अनुसार अप्रैल 1990 में ही लिट्टे ने राजीव गांधी की हत्या का फैसला कर लिया था। अप्रैल 1990 में श्रीलंका के जाफना स्थित लिट्टे मुख्यालय और भारत स्थित तमिल आतंकवादियों के बीच एक बातचीत ट्रैप हुई थी। इस बातचीत में राजीव गांधी को ‘डम्प’ करने की बात कही गयी थी। लेकिन न तो श्रीलंकाई सुरक्षा एजेंसियां और न ही भारती इंटेलीजेंस ब्यूरो इस बातचीत से पैदा होने वाले खतरे की आशंका को भांप पाया।

RAW के पूर्व अदिकारी बी रमन ने अपनी किताब ‘द कावब्वॉयज ऑफ आरएंडएडब्ल्यू’ में बताया है कि राजीव गांधी के प्रधानमंत्री रहने के दौरान और लोक सभा में नेता विपक्ष रहने के दौरान भी लिट्टे के आतंकवादियों से खतरे के प्रति RAW ने आगाह किया था। लेकिन हुआ वही जो नियति के मंजूर था। 21 मई 1991 की मनहूस तारीख को राजीव गांधी हमारे बीच नहीं रहे।

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