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पटना हनुमान मंदिर देश के टॉप 10 मंदिरों में शुमार, नैवेद्यम लड्डू को FSSAI ने दिया शुद्धता का सर्टिफिकेट

पटना : पटना के हनुमान मंदिर में में भोग लगने वाले नैवेद्यम लड्डू ने हनुमान मंदिर को देशंके टॉप 10 मंदिरों में शामिल कर दिया हैं। महावीर मंदिर के विशेष प्रसाद नैवेद्यम को भारत सरकार के खाद्य मंत्रालय से सर्टिफिकेट मिला है। इसकी शुद्धता की गारंटी FSSAI खाद्य सुरक्षा एवं प्राधिकरण ने ली है। भारत सरकार के खाद्य मंत्रालय की ओर से ‘भोग’ सर्टिफिकेट महावीर मंदिर के नैवेद्यम लड्डू को दिया गया है।

महावीर मंदिर के प्रमुख और IAS आचार्य किशोर कुणाल ने बताया कि “खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों ने महावीर मंदिर में हनुमान को लगाए जाने वाले नैवेद्यम लड्डू की जांच की थी। जांच प्रक्रिया में पूरी तरह से पास होने के बाद इसकी रिपोर्ट FSSAI को भेजी गई थी। FSSAI के CEO ने इस रिपोर्ट के आधार पर ब्लेजफुल हाइजीन आफरिंग टू गॉड का प्रमाण-पत्र जारी किया है।” देश के टॉप-10 मंदिरों के भोग में पटना के महावीर मंदिर में हनुमान को लगाया जाने वाला भोग नैवेद्यम भी शामिल हो गया है। यह बिहार का पहला और देश का 10 वां ऐसा मंदिर है, जहां के प्रसाद को प्रमाण पत्र मिला है।

कैसे बनता है नैवेद्यम

नैवेद्यम को तिरुपति के ब्राह्मण पूरी पवित्रता एव शुद्धता के साथ बनाते हैं। इसके लिए राजधानी के बुद्ध मार्ग में एक कारखाना तैयार किया गया है। यहा पर प्रतिदिन 35 ब्राह्मणों द्वारा प्रसाद तैयार किया जाता है। सभी स्नान के बाद साफ किये हुए कपड़ों को धारण करते हैं।

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नैवेद्यम के लिए शुद्ध बेसन से बुंदिया तैयार की जाती है। इसके बाद चीनी की चासनी में डालकर उसे मिलाया जाता है। मिलाने के क्रम में ही बुंदिया के साथ-साथ काजू, किशमिश, इलाइची और केसर मिलाया जाता है। चासनी में बुंदिया का मिश्रण लगभग दो घटे तक होता है। इसके बाद मिश्रण को लड्ड् बाधने वाले प्लेटफॉर्म पर रख दिया जाता है। यहा पर एक साथ 15 से 20 कारीगर खड़े होकर लड्डू बाधते हैं। यहा बैठकर लड्डू बनाने की परंपरा नहीं है।

आपको जानकर अचरज होगा की नैवेद्यम की बिक्री से होने वाले मुनाफे का 20 प्रतिशत कारीगरों में बांट दिया जाता है और शेष राशि महावीर कैंसर संस्थान को चली जाती हैं।

नैवेद्यम तिरुपति से पटना कैसे आया

महावीर मदिर न्यास समिति के सचिव आचार्य किशोर कुणाल बताते हैं कि महावीर मदिर में नैवेद्यम की शुरुआत वर्ष 1993 में हुई। वह कहते हैं, 93 में मैं तिरुपति मदिर दर्शन करने के लिए गया था। उस समय गृह मत्रालय के अधीन अयोध्या में ओएसडी था। तिरुपति में नैवेद्यम चढ़ाकर प्रसाद ग्रहण किया तो उसका स्वाद काफी पसद आया। उसी समय निर्णय लिया कि पटना जंक्शन स्थित महावीर मदिर में भी इसे प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाएगा। इसके कुछ ही दिनों बाद यहा नैवेद्यम का प्रसाद चढ़ाया जाने लगा।

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आपको बता दू की शुरुवात में नैवेद्यम पटना डेयरी के घी से बनाया जाता था लेकिन तिरुपति जैसा स्वाद न आने पर कर्नाटक के देशी गाय के घी का प्रयोग किया जाने लगा। तिरुपति मंदिर में भी नैवेद्यम कर्नाटक के देशी गाय के घी से ही बनता हैं। वर्तमान में नैवेद्यम लड्डू 250 रूपया प्रति किलो बिक रहा है।

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