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पंडित नेहरू के साथ अटल जी के रिश्ते, नेहरू ने क्यों कि थी अटल जी के प्रधानमंत्री बनने कि भविष्यवाणी

अटल जी भारतीय राजनीति के एक ऐसे नेता थे जिनके जीत कि कामना विपक्षी भी करते थे। काफी लंबे समय तक विपक्ष मे रहने और सत्ता पक्ष पर आक्रमक रहने की बाद भी गांधी नेहरू परिवार के साथ उनके अच्छे सम्बन्ध थे। अटल जी मानवीय और लोकतांत्रिक मूल्यों के पक्षधर थे। अटल जी गांधी नेहरू परिवार के अलवा अपने समकालीन सभी नेताओ काफी आदर सम्मान करते थे और सबसे उनका सम्बन्ध बहुत ही मधुर था। उस वक्त के सबसे बड़े कम्युनिस्ट और नक्सली नेता चारु मजूमदार की मौत पर अटल कि खुले रूप से श्रद्धांजलि दी थी।

वरिष्‍ठ पत्रकार किंशुक नाग ने अपनी किताब ‘अटल बिहारी वाजपेयी- ए मैन फॉर ऑल सीजन के अनुसार 1957 में जब अटल बिहारी वाजपेयी बलरामपुर से पहली बार लोकसभा सदस्‍य बनकर पहुंचे तो सदन में उनके भाषणों ने तत्‍कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को बेहद प्रभावित किया था। विदेश मामलों में वाजपेयी की जबर्दस्‍त पकड़ को देखकर पंडित नेहरू ने भी उनकी कई मौकों पर तारीफ की थी। एक छोटे से दल से सांसद बनकर लोकसभा पहुचकर वाजपेयी जी के हिंदी में दिए भाषण से नेहरू इस कदर प्रभावित हुए थे कि 1957 में ही उन्होंने वाजपेयी के भविष्य में भारत के प्रधानमंत्री होने की भविष्यवाणी कर दी थी। नेहरू ने कहा था ‘यह नौजवान एक दिन भारत का प्रधानमंत्री बनेगा।’

नेहरू जी की ये कथनी करीब 40 साल बाद 1990 के दशक में सच साबित हुई और 1996 में वो भारतीय जनता पार्टी की ओर से देश के प्रधानमंत्री बने। उन्हें तीन बार भारत के प्रधानमंत्री बनने का और उस वक्त तक सबसे ज्यादा दिन गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री रहने का गौरव प्राप्त है।

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1962 के लोकसभा चुनाव मै अटल जी पहले की ही तरह बलरामपुर लोकसभा से चुनाव लड़ रहे थे। इस बार अटल जी के सामने थी अंबाला और करनाल से लगातार दो बार सांसद रहीं दिल्ली के ब्राह्मण परिवार की सुभद्रा जोशी। उस वक्त विमल रॉय की फिल्म दो बीघा जमीन से अपनी पहचान बना चुके बलराज साहनी नेहरू जी के कहने पर ही सुभद्रा जोशी का प्रचार कर रहे थे। अटल जी के प्रति नेहरू जी का सॉफ्ट कॉर्नर देखिए कि नेहरू जी ने खुद सुभद्रा जोशी को अटल जी खिलाफ चुनाव लडने भेजा लेकिन कभी भी अटल जी के खिलाफ प्रचार करने नहीं आए। पत्रकार विश्वेश्वर भट्ट ने अपने एक आर्टिकल में लिखा था कि जब नेहरू को अटल के खिलाफ चुनाव प्रचार करने के लिए कहा गया तो नेहरू ने प्रचार करने से साफ मना करते हुए कहा – “मैं ये नहीं कर सकता। मुझ पर प्रचार के लिए दबाव न डाला जाए। उसे विदेशी मामलों की अच्छी समझ है।”

वरिष्‍ठ पत्रकार किंशुक नाग ने अपनी किताब ‘अटल बिहारी वाजपेयी- ए मैन फॉर ऑल सीजन’ मे लिखते है कि एक बार जब ब्रिटिश प्रधानमंत्री भारत की यात्रा पर आए तो नेहरू जी ने वाजपेयी से उनका परिचय कराते हुए कहा, “इनसे मिलिए, ये विपक्ष के उभरते हुए युवा नेता हैं। मेरी हमेशा आलोचना करते हैं लेकिन इनमें मैं भविष्य की बहुत संभावनाएं देखता हूं।” नेहरू जी अटल जी के विदेश नीति और हिंदी से काफी आकर्षित थे।

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सिर्फ नेहरू जी के ही अंदर अटल जी के लिए प्रेम नहीं था अटल जी भी नेहरू जी से काफी प्रेम करते थे। यह वाक्य 1977 का हैं जब वाजपेयी विदेश मंत्री बने और कार्यभार संभालने के लिए साउथ ब्‍लॉक के अपने दफ्तर पहुंचे तो उन्‍होंने देखा कि पहले से लगी पंडित नेहरू की तस्‍वीर गायब है। उन्‍होंने तुरंत अपने सेकेट्री से इस संबंध में पूछा तो पता लगा कि कुछ अधिकारियों ने जानबूझकर वह तस्‍वीर वहां से हटा दी क्‍योंकि पंडित नेहरू विरोधी दल के नेता थे। वाजपेयी ने आदेश देते हुए कहा कि उस तस्‍वीर को फिर से वहीं लगा दिया जाए।

नेहरू जी की मृत्य से अटल जी काफी मर्माहत थे लेकिन अपने धारदार लेखनी और मजबूत काव्यशैली से उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें भारतीय लोकतंत्र का सूरज और क्रांति का अग्रदूत बताया। अपने श्रद्धांजलि भाषण में अटल जी कहते है, “नेता चला गया है, लेकिन उसे मानने वाले अभी भी हैं। सूरज ढल चुका है, लेकिन अब हमे सितारों की रौशनी से ही अपना रास्ता तलाशना होगा। यह परीक्षा का समय है, अगर हम सब खुद को उनके विचारों पर आगे लेकर चले तो समृद्ध भारत के सपने सच कर सकते हैं, विश्व में शांति ला सकते हैं, यह सच में पंडित नेहरू को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।”

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