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जानिए कौन है भाजपा और टीएमसी के बागियों के निशाने पर रहने वाले अभिषेक बनर्जी ?

ममता के भाई अमित बनर्जी और भाभी लता बनर्जी के पुत्र अभिषेक का जन्म सात नवंबर, 1987 को हुआ था। कोलकाता में स्कूली शिक्षा के बाद उन्होंने दिल्ली के एक निजी संस्थान से बीबीए और एमबीए की डिग्री हासिल की।

उनका राजनीतिक सफर वर्ष 2011-12 में शुरू हुआ। उस समय टीएमसी युवा मोर्चा अध्यक्ष के तौर पर शुभेंदु अधिकारी काफी ताकतवर हो रहे थे उनके पर कतरने के लिए ममता ने तृणमूल युवा नामक एक संगठन बना कर उसकी कमान अभिषेक को सौंप दी। उसके बाद बुआ के वरदहस्त की वजह से उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। टीएमसी ने वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों में उनको डायमंड हार्बर सीट से उतारा था। टीएमसी की लहर में वे भारी वोटों से जीतकर महज़ 26 साल की उम्र में संसद तक पहुंच गए। वर्ष 2019 में बीजेपी की कड़ी चुनौती के बीच भी उन्होंने अपनी सीट बचाने में कामयाबी हासिल की।

अभिषेक बनर्जी पश्चिम बंगाल में दक्षिण 24-परगना ज़िले की डायमंड हार्बर सीट से टीएमसी सांसद और मौजूदा विधानसभा चुनाव में ममता के बाद पार्टी के दूसरे बड़े स्टार प्रचारक हैं। यह अभिषेक ही थे जो बीते लोकसभा चुनावों में बीजेपी की ओर से लगे झटके के बाद चुनाव रणनीतिकार प्रशांत कुमार उर्फ पीके को टीएमसी के खेमे में ले आए थे।

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बुआ-भतीजा होने के बावजूद ममता और अभिषेक की जीवनशैली में भारी अंतर है। ममता जहां अब भी सूती साड़ी और हवाई चप्पल में नज़र आती हैं। वहीं अभिषेक की जीवन शैली काफी आधुनिक है। वो दक्षिण कोलकाता के अपने आवास में कड़ी सुरक्षा के बीच रहते हैं। अब टीएमसी के तमाम पोस्टरों में ममता के अलावा अभिषेक की भी तस्वीरें नज़र आती हैं।

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भ्रष्टाचार के आरोप में लिप्त अभिषेक

अभिषेक के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति जुटाने और तोलाबाज़ी यानी उगाही के आरोप लगते रहे हैं। टीएमसी में अभिषेक का कद बढ़ने के साथ ही पार्टी के खिलाफ उगाही, भ्रष्टाचार और अवैध बिज़नेस के आरोप भी बढ़ते रहे हैं। लेकिन अब तक उनके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं है। हाल ही हाल में राज्य में कोयले के अवैध खनन और बिक्री के मामले की जांच कर रही सीबीआई ने अभिषेक की पत्नी रुजिरा बनर्जी से पूछताछ की थी। अभिषेक की शादी वर्ष 2012 में थाई नागरिक रुजिरा से हुई थी। ममता खुद उस शादी में शामिल नहीं हुई थीं। लेकिन अभिषेक की पत्नी को नोटिस मिलने के बाद ममता ने इसे केंद्र का सियासी हथकंडा करार दिया था।

अभिषेक के कारण टीएमसी से नेताओ का पलायन

एक वक्त जब ममता बनर्जी कम्युनिस्ट शासन मे एक आंदोलनकारी के तौर पर प्रताड़ित की जा रही थी। तब नन्हे अभिषेक इन सब को देखकर सियासत सीख रहे थे। एक वक्त जब शुवेंदू अधिकारी युवा मोर्चा अध्यक्ष के तौर पर उभर रहे थे तब उनके पर कतरने के लिए ममता ने अभिषेक को आगे किया। कहा जाता है कि राजनीति मे अभिषेक बनर्जी को लाने के लिए ममता पर मुकुल राय का बहुत दबाव था। लेकिन, अभिषेक के उभरते ही मुकुल राय पार्टी छोड़ बीजेपी का दामन थाम लिए।

टीएमसी से नाता तोड़ने वाले तमाम नेता तो एक शुर में यही दावा करते हैं कि अभिषेक के कारण पार्टी में बगावत हुई है। दिसंबर में बीजेपी में शामिल होने वाले शुभेंदु अधिकारी किसी दौर में ममता के सबसे करीबी नेता हुआ करते थे। लेकिन पार्टी में अभिषेक के बढ़ते कद की वजह से वे धीरे-धीरे हाशिए पर चले गए थे। शुभेंदु आरोप लगाते हैं, “टीएमसी को अब ममता नहीं बल्कि अभिषेक ही चला रहे हैं। कटमनी का तमाम पैसा उनके पास ही पहुंचता है।”

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टीएमसी के एक वरिष्ठ नेता मानते हैं कि अभिषेक पार्टी को कॉर्पोरेट तरीके से चलाने का प्रयास कर रहे हैं। इससे लोगों की नाराज़गी स्वाभाविक है। खासकर उनके मजबूत होने से मुकुल रॉय, शुभेंदु अधिकारी और सौमित्र खान जैसे नेताओं की अहमियत पार्टी में कम होने लगी। अपनी महत्वाकांक्षाओं को ठेस पहुंचते देख ही उन लोगों ने पार्टी से नाता तोड़ लिया था।

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