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इंदिरा गांधी का प्रेम प्रसंग प्रोफेसर फ्रैंक ऑबेरदॉर्फ और फिरोज गांधी के साथ

इंदिरा गांधी भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री थी जिन्हें आयरन लेडी के नाम से भी जाना जाता हैं। पंडित जवाहर लाल नेहरु की पुत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी का जन्म 19 नवम्बर 1917 को हुआ था। उन्होंने 26 मार्च 1942 को फ़िरोज़ गाँधी से प्रेम विवाह विवाह किया। ऐसा माना जाता है कि इस विवाह से पंडित नेहरू खुश नहीं थे और इंदिरा पंडित नेहरू को नजरंदाज कर फिरोज से शादी कि थी। लेकिन फिरोज गांधी से पहले भी इंदिरा का किसी और से प्रेम प्रसंग रहा था।

दुगुनी उम्र के प्रोफेसर फ्रैंक ऑबेरदॉर्फ ने इंदिरा गांधी को किया था प्रपोज

बात सन 1933 कि है जब पंडित नेहरू ने इंदिरा की महत्वाकांक्षाओं को दिशा देने के लिए नेहरू ने उन्हें साल 1933 में मशहूर कवि रवींद्रनाथ टैगोर के स्कूल शांति निकेतन भेजा। इंदिरा गांधी कि मुलाकात यहां पर प्रोफेसर फ्रैंक ऑबेरदॉर्फ से हुई। प्रोफेसर फ्रैंक  ऑबेरदॉर्फ शांति निकेतन में इंदिरा गांधी को जर्मन पढ़ाते थे। दरअसल ऑबेरदॉर्फ 1922 में साउथ अमेरिका में टैगोर से मिल चुके थे और भारतीय संस्कृति से प्रेम उन्हें 1933 में शांति निकेतन खीच लाया।

प्रोफेसर  फ्रैंक ऑबेरदॉर्फ पहली मुलाकात में ही इंदिरा गांधी के प्रति आकर्षित हो गए थे, वे इंदिरा से शादी कर घर बसाना चाहते थे। प्रोफेसर फ्रैंक ऑबेरदॉर्फ  इंदिरा गांधी को प्रपोज करने से खुद को नहीं रोक पाए अपने दिल कि बात जाहिर कर दिए। इंदिरा नाराज हो गई, उन्होंने जवाब दिया, ” देश में हालात गंभीर है और ऐसी बातें शोभा नहीं देतीं।” आगे उन्होंने कहा, ” वह जानती हैं कि वह कैसी दिखती हैं। इसलिए फ्रैंक या कोई और उन्हें क्या कहता है, उनके लिए मायने नहीं रखता।”

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इंदिरा उनसे दोस्ती की पेशकश करती रहीं, प्रोफेसर साहब प्यार पर अड़े रहे। थोड़े समय तक दोनों का रिश्ता चला। इंदिरा उनके सामने मन का बोझ हल्का करतीं, अपनी हताशा और अकेलेपन को उनसे बांटतीं फ्रैंक उन्हें खूबसूरत और अनूठी लड़की कहते थे।

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जवानी में ऐसी थी इंदिरा गांधी

इस घटना का जिक्र मशहूर लेखिका पुपुल जयकर की ‘इंदिरा गांधी बायोग्राफी’ किया गया है। पुपुल जयकार लिखती है, ‘इंदिरा प्रोफेसर फ्रैंक ऑबेरदॉर्फ से हर बात शेयर करती थी। वो दोनों घंटों राजनीति, खेल, देश-दुनिया की बातें शेयर करते थे लेकिन दूसरी तरफ इंदिरा ने प्रोफेसर को एक बात भी साफ-साफ कह दी।’ इंदिरा ने कहा, “मैं एक आम लड़की हूं कोई अनूठी नहीं। बस, आसाधारण पुरूष और अनूठी महिला की बेटी हूं”। वक्त के साथ इंदिरा आगे बढ़ती गईं और ये कहानी धुंधली होती चली गई।

फिरोज गांधी के साथ इंदिरा गांधी का प्रेम प्रसंग

फिरोज मूलरूप से पारसी परिवार से थे। फिरोज के साथ इंदिरा गांधी का प्रेम प्रसंग बाद मे शादी और जीवन साथी के रूप में बदल गया। इंदिरा गांधी से शादी कर पारसी फिरोज खान फिरोज गांधी बन गए। इंदिरा फिरोज को इलाहाबाद से ही जानती थी लेकिन मुलाकातों का सिलसिला लंदन मे शुरू हुआ।

16 साल की उम्र में ही इंदिरा गांधी फिरोज का पहला प्रपोजल ठुकरा चुकी थीं। लेकिन तीन साल बाद 1936 जब इंदिरा कि मां का मौत हो गया और तब उन्हें फिरोज के कंधों का सहारा मिला और दोनों में करीबी बढ़ने लगी क्युकी पिता नेहरू स्वतंत्रता संग्राम और कांग्रेस को लेकर इंदिरा को समय नहीं दे पाते थे।इस बार प्रपोजल इंदिरा गांधी के तरफ से था और फिरोज गांधी इंदिरा  के प्रपोजल को ठुकरा नही सके।

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इंदिरा गांधी ने पंडित नेहरू को पत्र लिखकर अपने इस फैसले के बारे में बताया। उस वक्त नेहरू देहरादून की जेल में बंद थे। पंडित नेहरू ने बिना किसी सवाल जवाब के इंदिरा को याद दिलाया कि डॉक्टरों ने उन्हें इतने कमजोर स्वास्थ्य के मद्देनजर प्रेग्नेंसी के खिलाफ सावधान किया था। पिता के मर्जी के खिलाफ इलाहाबाद में 1942 में दोनों ने प्रेम विवाह कर लिया।

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शादी के बाद इंदिरा गांधी और फिरोज गांधी

माना जाता है कि शादी के बाद भी इंदिरा और फिरोज के रिश्ते प्रेम विवाह के बाद भी काफी अच्छे नहीं थे। 1944 मे इंदिरा के पहले संतान राजीव का जन्म हुआ। इंदिरा पिता के साथ राजनीतिक कार्यक्रम मे भाग लेने लगी और फिरोज नेहरू द्वारा स्थापित अखबार नेशनल हेराल्ड के संपादन कि जिम्मा ले लिए।

दूसरे महिला के साथ फिरोज गांधी का प्रेम प्रसंग

थोड़े ही दिन बाद जब इंदिरा दूसरे संतान के लिए गर्भवती थी इसी बीच फिरोज के एक मुस्लिम लड़की के साथ प्रेम की खबर आयी हालांकि इस प्रेम प्रसंग का कोई सबूत नही मिला। सितंबर 1958 में इंदिरा पिता के साथ भूटान दौरे पर गईं। इसी बीच फिरोज के दिल के दौरे कि खबर आयी। इंदिरा जब लौटी तब फिरोज खतरे से बाहर थे। दोनों मे समझौता हो गया। दोनों कुछ दिनों के लिए छुट्टियां मनाने श्रीनगर चले गए। लेकिन, दिल्ली आते ही फिर दोनों मे दूरियां बढ़ गई।

कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष के तौर पर इंदिरा गांधी का नाम प्रस्तावित किया गया। 2 फ़रवरी को 41 वर्ष कि उम्र में इंदिरा कांग्रेस कि अध्यक्ष बनी। इंदिरा राजनीति में सक्रिय हो गई और फिरोज गांधी अपने घर में सक्रिय हो गए। फिरोज अपने 48वें जन्मदिन से पहले ही यानी 8 दिसंबर, 1960 को चल बसे।

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पुपुल जयकार लिखती है कि पंडित नेहरू का अपने दामाद के साथ अच्छे सम्बन्ध नहीं थे। फिरोज के मौत के बाद उनको श्रद्धांजलि देने आए लोगो की भीड़ को देखकर पंडित नेहरू हैरान थे।

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