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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का जीवन, मुन्ना से सुशासन बाबू तक का सफ़र

जनता दल यूनाइटेड के अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पिछले चार दशक से बिहार के राजनीति का शिरमौर बने हुए हैं। नीतीश कुमार ने अपने काम करने के तरीकों और नीतियों से यह साबित कर दिया कि अगर सरकारें चाहें तो बिहार जैसा पिछड़ा राज्य भी विकास के पटरी पर दौड़ सकता है। उनकी कुशल रणनीति और सही निर्णयों के चलते ही पटना के एक गांव का ‘मुन्ना’ देश की राजनीति में ‘सुशासन बाबू’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ और बिहार जैसे राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ 6 बार ली।

नीतीश कुमार का पारिवारिक जीवन

नीतीश कुमार का जन्म 1 मार्च 1951 को पटना के एक गांव बख्तियारपुर में हुआ था। उनके पिता का नाम कविराज राम लखन सिंह और माता का नाम परमेश्वरी देवी है। उनके पिता एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। नीतीश कुमार के पिता कांग्रेस से जुड़े थे। जब उन्हें कांग्रेस की तरफ से चुनाव लड़ने का मौका नहीं मिला, वह कांग्रेस छोड़कर जनता पार्टी से जुड़ गए। यहां आपको यह भी बता दें कि नीतीश कुमार के पिता विख्यात गांधीवादी नेता और भारत की संविधान सभा के सदस्य डॉ अनुराग नारायण सिन्हा के करीबियों में से एक थे।

नीतीश कुमार को परिवार में मुन्ना के नाम से भी पुकारा जाता है। नीतीश कुमार ने बख्तियारपुर के श्री गणेश हाई स्कूल से अपनी 12 वीं कक्षा तक की पढ़ाई कर रखी है। 12वीं पास करने के बाद इन्होंने बिहार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में दाखिला लिया था। इस कॉलेज से इन्होंने इंजीनियरिंग की डिग्री 1972 में प्राप्त की थी।

22 फरवरी 1973 को नीतीश कुमार ने मंजु कुमारी सिन्हा से शादी की थी, जो पेशे से एक शिक्षका थीं। उनका निशांत नाम का एक पुत्र है, जो बीआईटी मेसरा से ग्रेजुएट है। नीतीश कुमार की पत्नी मंजु कुमारी सिन्हा की 53 वर्ष की आयु में मृत्यु हो गई थी।

नीतीश कुमार के जीवन को लेकर दो आत्मकथाएं भी लिखी गई हैं। शंकरन ठाकुर द्वारा लिखी गई किताब का नाम ‘नीतीश कुमार और बिहार का उदय’ है जबकि अरुण सिन्हा द्वारा लिखी गई किताब ‘एकल आदमी: बिहार के नीतीश कुमार का जीवन और समय’ नाम से बाजार में उपलब्ध है।

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नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर

नीतीश कुमार ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुवात जय प्रकाश नारायण के छांव में शुरू किया था। 1974 से 1977 तक चले जेपी आंदोलन में बढ़-चढ़ कर अपनी भागीदारी निभाई। नीतीश कुमार ने जनता पार्टी से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी। साल 1977 में वह लालू प्रसाद यादव के साथ जनता पार्टी में शामिल हुए थे। दोनों नेताओं का सफर जेपी आंदोलन से ही शुरू हुआ था।

नीतीश कुमार अनुराग सिन्हा के पुत्र और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री सत्येन्द्र नारायण सिन्हा के करीबी थे। उन्होंने सबसे पहले वर्ष 1985 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में बिहार विधानसभा में कदम रखा। जिसके बाद 1987 में नीतीश कुमार युवा लोक दल के अध्यक्ष बनाए गए। इसके बाद साल 1989 में नीतीश बिहार में जनता दल इकाई के महासचिव और नौवीं लोकसभा के सदस्य बनाए गए।

लोकसभा में अपने पहले कार्यकाल के दौरान नीतीश कुमार केन्द्रीय राज्यमंत्री बनाए गए। उन्हें भूतल परिवहन और रेलवे मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई। लेकिन गैसल में हुई एक ट्रेन दुर्घटना के बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा से दिया और कृषि मंत्री बने। साल 1991 में नीतीश कुमार दोबारा लोकसभा के लिए चुने गए और इसके साथ ही पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव बनाए गए। उन्होंने लगातार साल 1989 से 2004 तक बाढ़ निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा का चुनाव जीता।

साल 2001 से 2004 के बीच एनडीए की सरकार के कार्यकाल के दौरान नीतीश कुमार ने कैबिनेट मंत्री के तौर पर रेल मंत्रालय संभाला। 2004 में नीतीश कुमार ने नालंदा और बाढ़ दोनों जगहों से चुनाव लड़ा था, जिसमें उन्हें नालंदा निर्वाचन क्षेत्र में तो जीत प्राप्त हुई लेकिन वह अपने पारंपरिक क्षेत्र बाढ़ से हार गए।

6 बार बिहार के मुख्यमंत्री बने नीतीश कुमार

नीतीश कुमार 6 बार बिहार के मुख्यमंत्री बनाए गए। पहली बार 3 मार्च 2000 को वह मुख्यमंत्री पद पर आसीन हुए लेकिन बहुमत साबित ना कर पाने के कारण केवल 7 दिनों में ही उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। लेकिन जब 2005 में लालू यादव के पंद्रह वर्ष से चले आ रहे एकाधिकार को समाप्त कर नीतीश कुमार ने एनडीए गठबंधन को बिहार विधानसभा चुनाव में जीत दिलवाई तब उन्हें ही प्रदेश का मुख्यमंत्री चुना गया। उन्होंने अपना यह कार्यकाल सफलतापूर्वक पूरा किया।मुख्यमंत्री के रूप में उनका तीसरा कार्यकाल 26 नवंबर, 2010 से 20 मई 2014 तक चला। जिसके बाद जीतन राम मांझी ने सत्ता संभाली।

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22 फरवरी 2015 को नीतीश कुमार ने चौथी बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।यानी बिहार की 15वीं विधानसभा में तीन बार सीएम पद की शपथ दिलाई गई, पहले नीतीश कुमार को फिर जीतन राम मांझी को और फिर वापस नीतीश कुमार को। नीतीश कुमार का चौथा कार्यकाल 22 फरवरी से 20 नवंबर 2015 तक चला। 16वीं विधानसभा के लिए हुए चुनावों के बाद नीतीश कुमार ने पांचवी बार सीएम पद की शपथ ली।

नीतीश कुमार का पांचवा कार्यकाल 20 नवंबर 2015 से लेकर 26 जुलाई 2017 तक चला। 26 जुलाई 2017 को उन्होंने आरजेडी और कांग्रेस के साथ गठबंधन तोड़ने के बाद बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। 27 जुलाई 2017 को बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के 24 घंटे के बाद नीतीश कुमार ने बीजेपी और एनडीए के समर्थन से बिहार के 6वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की।

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नीतीश कुमार से जुड़े विवाद

1.एनडीए द्वारा प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर नरेंद्र मोदी के नाम की घोषणा के बाद 2014 के आम चुनाव से पहले नीतीश कुमार ने एनडीए के साथ अपना गठबंधन तोड़ दिया था

2. 2015 में, लालू प्रसाद और कांग्रेस के साथ गठबंधन से बिहार चुनाव में आलोचना में रहे. लोग उन्हें ‘पलटूराम’ भी संबोधित करते रहे।

3.बिहार चुनाव के दौरान एक तांत्रिक से मिलने का वीडियो वायरल होने पर भी नीतीश कुमार विवादों में रहे।

4.2010 में जब उन्होंने अपने कैबिनेट मंत्री जमशेद अशरफ को बर्खास्त किया तो अशरफ ने उन पर आरोप लगाया कि वह शराब पर करों की चोरी में शामिल हैं, जिसके कारण 500 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है।

5.आरजेडी और कांग्रेस के साथ गठबंधन तोड़ने के बाद नीतीश कुमार ने बीजेपी के समर्थन से 24 घंटे में बिहार में सरकार बनाई।

6.मानव श्रृंखला को लेकर अक्सर नीतीश कुमार पर सरकारी ख़ज़ाने के दुरुपयोग का आरोप लगा।

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7.पटना में शिक्षक आंदोलन के दौरान लाठीचार्ज पर अक्सर विवादों में रहें नीतीश कुमार।

नीतीश कुमार की उपलब्धियां

1.साल 2015 में मुख्यमंत्री रहते हुए इन्होंने 1 लाख स्कूली शिक्षकों की भर्ती की थी ताकि इनके राज्य में पढ़ाई का स्तर बेहतर हो सके और लोगों को रोजगार भी मिल सके।

2.नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए बिहार में सूचना के अधिकार के इलेक्ट्रॉनिक संस्करण की शुरुआत की।

3.नीतीश कुमार ने मनरेगा के तहत ई-शक्ति कार्यक्रम की शुरुआत की, जिसके तहत फोन पर ही रोजगार से जुड़े समाचार उपलब्ध कराए जाते हैं।

4.नीतीश कुमार के कार्यकाल के दौरान बिहार में फैस्ट ट्रैक न्यायालयों के तहत पहले की अपेक्षा कहीं ज्यादा आपराधिक मामलों का निपटारा किया गया।

5.नीतीश कुमार ने अपने कार्यकाल के दौरान प्रत्येक स्कूल जाने वाली लड़की को साइकिल उपलब्ध कराने की योजना भी शुरू की, जिसके चलते ज्यादा से ज्यादा लड़कियों ने स्कूल जाना शुरू किया।

6.मुफ्त दवाइयां, चिकित्सीय सेवाएं और किसानों को ऋण देने जैसी सेवाएं भी शुरू की गईं।

7.पूर्व राष्ट्रपति अबुल कलाम और नीतीश कुमार की पहल के कारण नालंदा अंतरराष्ट्रीय यूनिवर्सिटी प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई।

8.रेल मंत्री रहते हुए उन्होंने रेल सेवा को सुचारू रूप से चलाने और टिकटों की बुकिंग को आसान बनाने के लिए इंटरनेट टिकट बुकिंग और तत्काल सेवा प्रारंभ की। इसके अलावा नीतीश कुमार ने टिकट बुक कराने के लिए भी प्रचुर मात्रा में रेलवे टिकट काउंटर खुलवाए।

आपको बता दु की नीतीश कुमार इंजीनियरिंग ग्रेजुएट हैं। नीतीश कुमार राजनीतिज्ञों की समाजवाद विचारधारा के समर्थक हैं। उन्होंने अपने राजनैतिक जीवन की शिक्षा जयप्रकाश नारायण, राममनोहर लोहिया, एस एन सिन्हा, कर्पुरी ठाकुर और वी पी सिंह से ली। नीतीश कुमार प्रगतिवादी और व्यवहारिक सोच वाले नेता हैं। वह नई विचारधारा से प्रभावित लेकिन गंभीर व्यक्तित्व के स्वामी हैं। यही वजह है कि लोग उन्हें ‘सुशासन बाबू’ के नाम से भी बुलाते हैं। नीतीश कुमार भारत सरकार में रेल मंत्री, भू-तल परिवहन मंत्री और कृषि मंत्री रह चुके हैं।

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