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भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी : मध्य प्रदेश के ग्वालियर से प्रधानमंत्री तक का सफर

देश के सबसे बड़े असाधारण वक्ता, कवि और प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी का जन्म मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में 25 दिसंबर 1924 को गुलाम भारत में हुआ था। इनके पिता का नाम कृष्ण बिहारी वाजपेयी और माता का नाम कृष्ण वाजपेयी था। इनके पिता मुख्यतः उत्तर प्रदेश के निवासी थे लेकिन मध्यप्रदेश के विदिशा जिले में अध्यापक का कार्य करते थे।

अटल जी को बाल्यकाल से हिंदी साहित्य, गीत संगीत और पुस्तको के प्रति काफी लगाव था। महात्मा रामचंद्र वीर द्वारा रचित अमर कृति ’विजय पताका’ पढ़कर अटक जी की जीवन दशा बदल गई। गुलाम भारत में आजादी के लिए बहने वाली बयार से ये भी अछूते नहीं रहे। 1942 में महात्मा गांधी के अंग्रेजो भारत छोड़ो आंदोलन में जब इनके भाई को 23 दिनों के लिए गिरफ्तार कर लिया गया तब ये भी आंदोलन में कूद पड़े।

जनसंघ से जुड़ाव

आजादी के बाद अटल जी गणतांत्रिक भारत के राजनीतिक घटना क्रम से भी अछूते नहीं रहे। 1951 में जब श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जनसंघ की स्थापना की तब से अटल जी उनके साथ जुड़ गए। जनसंघ की स्थापना के कुछ ही साल बाद श्यामा प्रसाद मुखर्जी कश्मीर के पूर्ण विलय की लड़ाई लड़ने लगे। कश्मीर में जब डॉ. मुखर्जी परमिट तोड़कर प्रवेश किये तो उस अटल जी बतौर पत्रकार उनके साथ थे। डॉ. मुखर्जी ने अटलजी से कहा;वाजपेयी गो बैक एंड टेल द पीपल ऑफ़ इंडिया डॉ. मुखर्जी इन्टर्ड जम्मू कश्मीर विदाउट परमिट। बस उसके बाद अटल जी फिर कभी पीछे मुड़कर नही देखे। इसी बीच 23 जून 1953 को अचानक डॉ. मुखर्जी, जो की कश्मीर में नजरबन्द थे उनके रहस्यमयी मौत की खबर आई। अटलजी पर उसका गहरा प्रभाव पड़ा और उन्होंने संघ के विचाधारा से खुद को जोड लिया। उसके बाद अटल जी आजीवन दक्षिणपंथ के समर्थक बने रहे।

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ग्वालियर से प्रधानमंत्री तक का सफर

अटल जी 1968 से 1973 तक जनसंघ के अध्यक्ष रहे। अटल जी अपने जीवन का पहला चुनाव लखनऊ लोकसभा सीट से लड़े उस वक्त उपचुनाव हो रहा था। लेकिन,पहली ही बार उन्हें हार का समाना करना पड़ा। 1959 अटल जी पुनः लोकसभा चुनाव लड़े। लेकिन इस बार एक साथ तीन जगहों से एक साथ लोकसभा चुनाव लड़े थे। उत्तर प्रदेश के ही तीन लोकसभा क्षेत्र लखनऊ, मथुरा और बलरामपुर सीट से चुनाव लड़े। लखनऊ से हार गए, मथुरा से जमानत जप्त हो गई लेकिन बलरामपुर लोकसभा से जीत गए। जब पहली बार संसद भवन के लोकसभा के सदस्य बने तब उस वक्त के तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू जी ने उनके ओजस्वी भाषण को सुना तो भविष्यवाणी कर दिया की यह लड़का एक दिन जरूर प्रधानमंत्री बनेगा। लेकिन 1962 में अटल जी बलरामपुर लोकसभा चुनाव कांग्रेस के सुभद्रा जोशी से हार गए। इस चुनाव में सुभद्रा जोशी के लिए उस वक्त के मशहूर फिल्मी अभिनेता बलराज साहनी प्रचार कर रहे थे। ऐसा कहा जाता है की सुभद्रा जोशी को बलरामपुर से चुनाव लडने के लिए नेहरू जी ने भेजा था लेकिन नेहरू जी कभी भी सुभद्रा के लिए प्रचार करने नही गए। एक समाचार पत्र को दिए इंटरव्यू में नेहरू जी ने कहा था ”उसे विदेश मामलों की अच्छी जानकारी है मुझे उसके खिलाफ प्रचार के लिए दबाव न बनाया जाय”। उसके बाद पंडित दीनदयाल उपाध्याय के दबाव पर जनसंघ ने अटल जी को राज्यसभा भेजा क्योंकी दीनदयाल जी किसी भी कीमत पर अटल जी को संसद में देखना चाहते थे। अटल जी कुल 2 बार राज्यसभा के लिए मनोनीत हुए।

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मोरारजी देसाई की सरकार में अटल जी 1977 से 1979 तक विदेश मंत्री रहे। जनता पार्टी के अंदरूनी कलह के वजह से जनता पार्टी को छोड़कर 1980 में भारतीय जनता पार्टी का स्थापना किए। 6 अप्रैल 1980 को अटल जी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। पहली बार 1996 में 16 मई से 31 मई तक के लिए प्रधानमंत्री बने। पुनः 19 मार्च 1998 को प्रधानमंत्री बने और इस बार 5 साल तक का कार्यकाल पूरा किया।

अटल जी को 1998 पोखरण परमाणु परीक्षण के लिए अजीवन याद किया जाएगा। 1998 में अटल जी के नेतृत्व ने देश में सफल परमाणु परीक्षण कर अमेरिका के सीआईए को मात देकर दुनिया के परमाणु शक्तिशाली देशों में सुमार कर दिया। अटल जी के ही समय देश को पाकिस्तान के खिलाफ कारगिल युद्ध छेड़ना पडा। शाइनिंग इंडिया के नारे के बाद भी 2004 में हुए आम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। अटल जी सत्ता से हट गए लेकिन उनके कार्य आज भी उनके यादों को ताजा किए हुए है।

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संयुक्त राष्ट संघ में हिंदी में भाषण देने वाले पहले व्यक्ति अटल जी थे। वर्षो से चले आ रहे कावेरी जल विवाद को सुलझाने वाले व्यक्ति अटल जी ही थे। राष्ट्रीय सुरक्षा समिति, कावेरी जल विवाद सुलह, राष्ट्रीय राजमार्गो का विकास, कश्मीर मामले के सुलह, दिल्ली लाहौर बस सेवा जैसे महत्वपूर्ण कार्य ने अटल जी को वैश्विक स्तर का नेता बना दिया। लेकिन, कुछ कार्यों ने अटल जी के दामन में दाग का काम किया। कारगिल युद्ध के समय शहीदों के ताबूत घोटाला, कंधार विमान अपहरण और संसद भवन पर आतंकी हमला उनके कार्यकाल पर प्रश्नचिन बन गए।

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अटल जी एक सफल राजनेता के साथ ही एक ओजस्वी वक्ता और उत्तम कवि भी थे। ’’गीत नया गाता हूं” उनकी सबसे प्रसिद्ध कविता है। उनकी पहली कविता ताजमहल हैं । लोकसभा में उनके अमूल्य भाषणों को अमर बलिदान नाम से संग्रह किया गया है। अटल जी ने एक संपादक के तौर पर राष्ट्रधर्म, पांचजन्य और वीर अर्जुन का संपादन भी किया। भारतीय राजनीति में अमूल्य योगदान के लिए अटल जी को पद्म विभूषण और भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।

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