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अटल बिहारी वाजपेयी ने इंदिरा गांधी को दुर्गा क्यों कहा

देश में अक्सर पक्ष, विपक्षलेखक और सभी पत्रकारों के बीच ये बहस चलता रहता है कि क्या सच मै अटल जी ने इंदिरा को सच मे दुर्गा कहा था या नहीं। संसद में अटल जी के दिए हुए एक भाषण की चर्चा की जाती है जिसमें उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को कथित तौर पर दुर्गा कहकर संबोधित किया था।आइए जानते है क्या सच में अटल जी ने दुर्गा कहा था और क्या था पूरा घटनाक्रम।

कब कहा था इंदिरा गांधी को दुर्गा

बात 1971 कि है जब इंदिरा गांधी भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में सत्ता में थी और अटल बिहारी विपक्ष के नेता के रूप में थे। बांग्लादेश मुक्ति संग्राम यानी पाकिस्तान के साथ पूर्वी मोर्चे पर पाकिस्तान के 90,368 सैनिकों जनरल जिया नेतृत्व में भारतीय सैनिकों के सामने सरेंडर किया था। जिसके परिणाम स्वरूप भारत ने पाकिस्तान को इस युद्ध में हराया और विश्व पटल पर एक नया देश बांग्लादेश आया। जब संसद भवन में इस युद्ध पर चर्चा हो रही थी तब बिहारी वाजपेयी ने विपक्ष के नेता के तौर पर एक कदम आगे जाते हुए इंदिरा को ‘दुर्गा’ करार दिया। अटल जी ने कहा था, “जिस तरह से इंदिरा ने इस लड़ाई में अपनी भूमिका अदा की है, वह वाकई काबिल-ए-तारीफ है। सदन में युद्ध पर बहस चल रही थी और वाजपेयी ने कहा कि हमें बहस को छोड़कर इंदिरा की भूमिका पर बात करनी चाहिए जो किसी दुर्गा से कम नहीं थी।”

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इस बात का जिक्र मशहूर टीवी पत्रकार विजय त्रिवेदी ने अपनी किताब ’हार नहीं मानूंगा – एक अटल जीवन गाथा’ में अटल जी के एक मित्र के हवाले से भी लिखा है। विजय त्रिवेदी लिखते है कि ” वाजपेयी दिल्ली में थे। वहीं पर देवी प्रसाद त्रिपाठी उर्फ डीपीटी भी भर्ती थे। दोनों को प्राइवेट कमरे। दोनों खाने-पीने के शौकीन। वाजपेयी ने डीपीटी से पूछा – “देवी प्रसाद, शाम की क्या व्यवस्था है।” डीपीटी नीचे उतरे। पीसीओ से एक आईएफएस अफसर की बहन को फोन किया। उम्दा विह्स्की की इंतजाम हो गया।” विहस्की का दूं घुट लेने के बाद वाजपेयी ने डीपीटी से कहा, ”इंदिरा ने अपने बाप नेहरू से कुछ नहीं सीखा। मुझे दुख है कि मैंने उन्हें दुर्गा कहा।”

रजत शर्मा के शो में दुर्गा वाले कथन से इनकार

इस घटना के दो दशक बाद जब अटल जी पीएम बन गए, तो मशहूर टीवी पत्रकार रजत शर्मा को दिए इंटरव्यू में दुर्गा वाले कथन से साफ इनकार कर गए। रजत शर्मा के सवाल के जवाब मे उन्होने कहा, “मैंने दुर्गा नहीं कहा, यह भी अख़बार वालों ने छाप दिया और मैं खंडन करता रह गया कि मैंने उन्हें दुर्गा नहीं कहा। नहीं कहा। फिर इस पर बड़ी खोज हुई। श्रीमती पुपुल जयकर ने इंदिरा जी के बारे में एक पुस्तक लिखी और उस पुस्तक में वो इस बात का उल्लेख करना चाहती थीं कि वाजपेयी ने इंदिरा गांधी को दुर्गा कहा है। तो वो मेरे पास आयीं। मैंने कहा कि मैंने ये नहीं कहा। मेरे नाम से छप ज़रूर गया था। तो फिर उन्होंने लाइब्रेरी में जाकर सारी पुस्तकें खंगाल लीं। सारी कार्यवाहियां देख लीं। पर उसमे कहीं दुर्गा नहीं मिला। पर अभी भी दुर्गा मेरे पीछे हैं। जैसा आपके सवाल से लगता है।”

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